सतना-मैहर में पंचायतों के पंप कनेक्शनों पर 102.87 करोड़ बिजली बकाया संकट बन गया है। वसूली लगभग शून्य है, अधिभार बढ़ रहा है और बिजली कटौती की स्थिति में ग्रामीण जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
सतना-मैहर में चना, मसूर और तुअर उपार्जन के लिए 2672 एमटी लक्ष्य तय हुआ। 54 हजार बारदाने उपलब्ध हैं और 80 गठान और आएंगे। किसानों के लिए आठ उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं।
सतना और मैहर वनमंडलों में संरक्षित नीलगाय लगातार शिकारियों के निशाने पर है। सर्दियों में घटनाएं बढ़ीं, फसल नुकसान और अवैध मांस कारोबार संभावित कारण माने जा रहे हैं, जबकि वन विभाग कार्रवाई में जुटा है।
सतना और मैहर जिले में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान 12वीं में दो सौ से अधिक परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे, वहीं एक छात्र से दोबारा परीक्षा शुल्क वसूली पर विवाद गहराया।
सतना और मैहर जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली चरमराई। सरकारी रिपोर्ट में 823 में से 623 राशन दुकानों के बंद होने से हजारों जरूरतमंद परिवार संकट में।
सतना और मैहर जिलों में आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के हजारों बुजुर्ग अब भी मुफ्त इलाज से वंचित हैं। धीमी प्रगति, तकनीकी बाधाएं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सतना और मैहर जिलों में रबी फसलों के बीमा आवेदन बीते साल की तुलना में करीब 50 प्रतिशत कम दर्ज किए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि नजदीक होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान बीमा सुरक्षा से बाहर हैं, जिससे भविष्य के जोखिम बढ़ सकते हैं।
सतना और मैहर जिले के गांवों में बंदरों, जंगली सुअर और नीलगायों के आतंक से किसान परेशान हैं। वन विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है, पंचायतों के पास संसाधन नहीं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को हस्ताक्षर अभियान के जरिए गुहार लगाने की ठानी।
सतना-मैहर जिले में गणवेश योजना की राशि छात्रों तक नहीं पहुंच सकी। 13,598 बच्चों के खाते फेल हो गए जबकि 2249 छात्रों को रोजगार सहायकों की लापरवाही से समग्र आईडी न होने पर वंचित रहना पड़ा। 8 करोड़ से अधिक की राशि तो जारी हुई, लेकिन कई छात्र अब भी इंतजार में हैं।
सतना-मैहर फोरलेन और नागौद लिंक रोड निर्माण कार्य एसडीओ बृजेश सिंह की स्वेच्छाचारिता और लापरवाही से प्रभावित हो रहा है। करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़क का काम धीमी गति से चल रहा है, जबकि विभागीय पत्राचार और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। रीवा मुख्य अभियंता कार्यालय की चुप्पी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।






















